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कानपुर शूटआउट की कहानी, जेसीबी ड्राइवर की जुबानी :विकास दुबे की छत पर बैठे थे 20-25 असलहाधारी, 20 मिनट फायरिंग के बाद गैंगस्टर के ‘गनकट’ कहते ही फरार हुए थे बदमाश

Vishakha Sharma/New Delhi

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी जेसीबी ड्राइवर राहुल पाल। उसने बताया कि उस वक्त मैं बहुत घबराया हुआ था। जैसे ही फायरिंग बंद हुई, मैं वहां से कूदकर भाग गया।
  • दो जुलाई की रात कानपुर के बिकरु गांव में गैंगस्टर विकास दुबे ने सीओ समेत आठ पुलिसवालों की हत्या कर दी थी
  • 10 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे का एनकाउंटर किया, घटना के 15वें दिन जेसीबी ड्राइवर राहुल गिरफ्तार
  • उसने बताया- मैंने देखा था विकास दुबे की छत से खूनी मंजर, 20-25 असलहाधारी ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे

उसने बताया कि विकास दुबे की छत पर 20-25 असलहाधारी बैठे थे, जो पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे थे। जब कई पुलिसकर्मी गोली लगने से ढेर हो गए तो दुबे ने चिल्लाकर ‘गनकट’ कहा था। इसके बाद सन्नाटा पसर गया और बदमाश अपनी पोजिशन छोड़कर फरार हो गए थे। पुलिस राहुल से पूछताछ कर रही है।

कानपुर पुलिस ने उसी जेसीबी से विकास दुबे का घर ढहाया था, जिससे उसने पुलिस का रास्ता रोका था।

विकास दुबे के मामा पांडेय ने जेसीबी लेकर चलने को कहा था
जेसीबी ड्राइवर राहुल पाल ने बताया, “दो जुलाई को मैं खेत पर काम कर रहा था। मेरे पास विकास दुबे का मामा प्रेम प्रकाश पांडेय आया था। उसने कहा कि जेसीबी लेकर चलो। विकास भैया ने बुलाया है। अर्जेंट काम है। जल्दी गाड़ी ले चलो। जब मैं बिकरू गांव पहुंचा तो देखा कि वहां पर काफी लोग खड़े थे।

जहां पर मैं पहले जेसीबी खड़ी करता था वहीं पर साइड खड़ी करने लगा। इस विकास दुबे ने कहा कि जेसीबी रास्ते में लगा दो। मैंने कहा कि रास्ता जाम हो जाएगा, इस पर विकास दुबे मुझसे कहने लगे कि जितना कहता हूं, उतना सुन ज्यादा बकवास करने का टाइम नहीं है।”

विकास की छत पर बैठे थे 20 से 25 असलहाधारी
राहुल ने बताया, “मैंने गाड़ी को रास्ते में लगा दिया और नीचे उतरने लगा तो विकास दुबे ने गाड़ी में सोने के लिए कहा। फिर उसने वहां मौजूद धीरू नाम के शख्स से कहा कि इसे ले जाकर छत पर बंद कर दो। मुझे विकास दुबे की छत पर चढ़ा दिया गया। जीने से लगी खिड़की पर कुंडी लगा दी गई थी।

जब छत पर पहुंचा तो देखा कि 20 से 25 लोग बैठे हुए थे और सभी के हाथों में असलहे थे। मैं उसमें विकास दुबे, धीरू, अमर दुबे, अतुल दुबे, प्रभात मिश्रा, प्रेम प्रकाश, सूबेदार को मैं पहचानता था। इसके अलावा नए चेहरे थे, उनकों मैं नहीं पहचानता था।”

छत की छज्जे पर लेटकर बचाई थी जान- राहुल पाल
राहुल ने बताया, “मैं बहुत घबराया हुआ था, कुछ देर बाद वहां पर फायरिंग होने लगी। छत किनारे एक छज्जा था, मैं वहीं लेट गया। बहुत जबरदस्त फायरिंग हो रही थी। मुझे बाद में पता लगा कि पुलिस वालों पर फायरिंग हो रही थी। छत से विकास के आदमी गोली चला रहे थे। लगभग 15 से 20 मिनट फायरिंग होने के बाद विकास दुबे की अवाज आई ‘गनकट’ इसके बाद पूरा माहौल शांत हो गया था। थोड़ी देर मैंने देखा कि टार्च ही टार्च जल रही थी। किसी तरह से मैं वहां से कूद कर भाग गया।”

विकास दुबे। पुलिस ने इसका 10 जुलाई की सुबह एनकाउंटर कर दिया था।

आठ पुलिसकर्मियों की हुई थी हत्या

बिकरु गांव चौबेपुर थाना क्षेत्र में है। दो जुलाई को बिकरु गांव में चौबेपुर के अलावा शिवराजपुर और बिठूर थाने की फोर्स लेकर सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पहुंचे थे। लेकिन, विकास दुबे को दबिश की भनक पहले ही लग गई थी।

टीम के पहुंचते ही गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों ने हमला कर दिया था, जिसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की जान गई थी। जबकि, छह पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अब इस मामले में 11 आरोपी फरार हैं। जबकि, विकास दुबे समेत छह आरोपियों का एनकाउंटर हो चुका है।

SOURCE-DAINIK BHASKAR

 

 

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